श्री केसरिया कुंथुनाथ 28 अखण्ड ज्योति – दीपक मन्दिर तीर्थ 

अजित कॉलोनी, रातानाडा, जोधपुर – 342003 (राज.) इण्डिया मो.-09314708100 फोन न.: 0291-2516292

विचित्र लेकिन अनूठा सत्य

इस तीर्थ में प्रज्वलित 28 अखण्ड ज्योतियों में से एक

संपूर्ण विश्व का एक मात्र मंदिर

जहाँ जून, 1993 से 28 अखंड ज्योति दीपक (27 शुद्ध घी व एक मूंगफली के तेल से)चोबीस घंटे (Round the Clock) प्रज्वलित है |
जिनकी विस्मयकारी चमत्कारिक विशेषता हैं कि-
विस्मय है – इन सभी ज्योतियों में जून 1993 से काले काजल की अपेक्षा पीला चन्दन एवं नवम्बर, 2008 से इन ज्योतियों में केसर की पंखुडियाँ झुलती हुई दिखाई देने लगी है |
अति विस्मय है- मूंगफली के तेल से प्रज्वलित एक ज्योति में अत्यंत केसरिया रंग का चन्दन एकत्रित होता हैं | जबकि घी के दीपक की अपेक्षा तेल का दीपक सर्वाधिक कला होना चाहिए |
अति अति विस्मय- जहाँ ज्योति में जून 2009 से सफ़ेद चन्दन एकत्रित होता है|
अ) वैदिक धर्मशास्त्रों के अनुसारसफ़ेद चन्दन के वृक्ष – जंगल केवल देवलोक में ही उपलब्ध हैं | देवलोक में देवता भगवान शिव की पूजा सदैव सफ़ेद चन्दन से किया करते हैं | यही कारण हैं की पृथ्वीलोक में भगवन शिव पर ॐ की आकृति सफ़ेद रंग में ही अंकित की जाती हैं |
ब) जैन मतानुसार सफ़ेद चन्दन के वृक्ष – जंगल  मे मल्यागिरी पर्वत में है | इसी जंगल में माँ चक्रेश्वरी का निवास है और इस मंदिर में केसरिया कुंथुनाथ से माँ चक्रेश्वरी का अति विशेष लगाव आभास किया जाता रहा है |
स) इस तीर्थ मन्दिर में पट मंगल नहीं होता हैं अर्थात यात्रियों के लिये दर्शन हेतु मन्दिर 24 घंटे खुला रहता हैं |     
सम्पूर्ण जानकारी बाबत इस तीर्थ मंदिर का विस्तृत इतिहास उपलब्ध है | आप इसे स्वयं या डाक द्वारा निशुल्क मंगवा सकते है |

Contact-

9314708100
राजरुपचंद मेहता
अध्यक्ष

28akhand
gujrati
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मूलनायक श्री केसरिया कुंथुनाथ भगवान

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श्री केसरिया कुंथुनाथ 28 अखण्ड ज्योति – दीपक मन्दिर तीर्थ 

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इस तीर्थ में प्रज्वलित 28 अखण्ड ज्योतियों में से एक

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जहाँ जून, 1993 से 28 अखंड ज्योति दीपक (27 शुद्ध घी व एक मूंगफली के तेल से)चोबीस घंटे (Round the Clock) प्रज्वलित है |
जिनकी विस्मयकारी चमत्कारिक विशेषता हैं कि-
विस्मय है – इन सभी ज्योतियों में जून 1993 से काले काजल की अपेक्षा पीला चन्दन एवं नवम्बर, 2008 से इन ज्योतियों में केसर की पंखुडियाँ झुलती हुई दिखाई देने लगी है |
अति विस्मय है- मूंगफली के तेल से प्रज्वलित एक ज्योति में अत्यंत केसरिया रंग का चन्दन एकत्रित होता हैं | जबकि घी के दीपक की अपेक्षा तेल का दीपक सर्वाधिक कला होना चाहिए |
अति अति विस्मय- जहाँ ज्योति में जून 2009 से सफ़ेद चन्दन एकत्रित होता है|
अ) वैदिक धर्मशास्त्रों के अनुसारसफ़ेद चन्दन के वृक्ष – जंगल केवल देवलोक में ही उपलब्ध हैं | देवलोक में देवता भगवान शिव की पूजा सदैव सफ़ेद चन्दन से किया करते हैं | यही कारण हैं की पृथ्वीलोक में भगवन शिव पर ॐ की आकृति सफ़ेद रंग में ही अंकित की जाती हैं |
ब) जैन मतानुसार सफ़ेद चन्दन के वृक्ष – जंगल  मे मल्यागिरी पर्वत में है | इसी जंगल में माँ चक्रेश्वरी का निवास है और इस मंदिर में केसरिया कुंथुनाथ से माँ चक्रेश्वरी का अति विशेष लगाव आभास किया जाता रहा है |
स) इस तीर्थ मन्दिर में पट मंगल नहीं होता हैं अर्थात यात्रियों के लिये दर्शन हेतु मन्दिर 24 घंटे खुला रहता हैं |     
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जहाँ जून, 1993 से 28 अखंड ज्योति दीपक (27 शुद्ध घी व एक मूंगफली के तेल से)चोबीस घंटे (Round the Clock) प्रज्वलित है |
जिनकी विस्मयकारी चमत्कारिक विशेषता हैं कि-
विस्मय है – इन सभी ज्योतियों में जून 1993 से काले काजल की अपेक्षा पीला चन्दन एवं नवम्बर, 2008 से इन ज्योतियों में केसर की पंखुडियाँ झुलती हुई दिखाई देने लगी है |
अति विस्मय है- मूंगफली के तेल से प्रज्वलित एक ज्योति में अत्यंत केसरिया रंग का चन्दन एकत्रित होता हैं | जबकि घी के दीपक की अपेक्षा तेल का दीपक सर्वाधिक कला होना चाहिए |
अति अति विस्मय- जहाँ ज्योति में जून 2009 से सफ़ेद चन्दन एकत्रित होता है|
अ) वैदिक धर्मशास्त्रों के अनुसारसफ़ेद चन्दन के वृक्ष – जंगल केवल देवलोक में ही उपलब्ध हैं | देवलोक में देवता भगवान शिव की पूजा सदैव सफ़ेद चन्दन से किया करते हैं | यही कारण हैं की पृथ्वीलोक में भगवन शिव पर ॐ की आकृति सफ़ेद रंग में ही अंकित की जाती हैं |
ब) जैन मतानुसार सफ़ेद चन्दन के वृक्ष – जंगल  मे मल्यागिरी पर्वत में है | इसी जंगल में माँ चक्रेश्वरी का निवास है और इस मंदिर में केसरिया कुंथुनाथ से माँ चक्रेश्वरी का अति विशेष लगाव आभास किया जाता रहा है |
स) इस तीर्थ मन्दिर में पट मंगल नहीं होता हैं अर्थात यात्रियों के लिये दर्शन हेतु मन्दिर 24 घंटे खुला रहता हैं |     
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विस्मय है – इन सभी ज्योतियों में जून 1993 से काले काजल की अपेक्षा पीला चन्दन एवं नवम्बर, 2008 से इन ज्योतियों में केसर की पंखुडियाँ झुलती हुई दिखाई देने लगी है |
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